जॉन सेवक-बस, यही बात है, वे लोग मुझे वहाँ से निकाल देना चाहते हैं। अगर रिआयत की गई, तो मेरे गोदाम में जरूर आग लग जाएगी।
महेंद्रकुमार-मैं खूब समझ रहा हूँ। यों मैं स्वयं जनवादी हूँ और उस नीति का हृदय से समर्थन करता हूँ; पर जनवाद के नाम पर देश में जो अशांति फैली हुई है, उसका मैं घोर विरोधी हूँ। ऐसे जनवाद से तो धानवाद, एकवाद, सभी वाद अच्छे हैं। आप निश्चिंत रहिए।
इसी भाँति कुछ देर और बातें करके राजा साहब को खूब भरकर
जॉन सेवक-बस, यही बात है, वे लोग मुझे वहाँ से निकाल देना चाहते हैं। अगर रिआयत की गई, तो मेरे गोदाम में जरूर आग लग जाएगी।
महेंद्रकुमार-मैं खूब समझ रहा हूँ। यों मैं स्वयं जनवादी हूँ और उस नीति का हृदय से समर्थन करता हूँ; पर जनवाद के नाम पर देश में जो अशांति फैली हुई है, उसका मैं घोर विरोधी हूँ। ऐसे जनवाद से तो धानवाद, एकवाद, सभी वाद अच्छे हैं। आप निश्चिंत रहिए।
इसी भाँति कुछ देर और बातें करके राजा साहब को खूब भरकर