तो अभी कल ही धोले का आया था। घर में कोई चीज तो बचती ही नहीं। न जाने इस चुड़ैल का पेट है या भाड़।
सुभागी-मुझसे कसम ले लो, जो प्याज हाथ से भी छुआ हो। ऐसी जीभ होती, तो इस घर में एक दिन भी निबाह न होता।
भैरों-प्याज नहीं था, तो लाई क्यों नहीं?
जगधार-जो चीज घर में न रहे, उसकी फिकर रखनी चाहिए।
सुभागी-मैं क्या जानती थी कि आज आधी रात को प्याज की धुन सवार होगी।
भैरों ताड़ी के नशे में था। नशे में भी क्रोध का-सा गुण है,
तो अभी कल ही धोले का आया था। घर में कोई चीज तो बचती ही नहीं। न जाने इस चुड़ैल का पेट है या भाड़।
सुभागी-मुझसे कसम ले लो, जो प्याज हाथ से भी छुआ हो। ऐसी जीभ होती, तो इस घर में एक दिन भी निबाह न होता।
भैरों-प्याज नहीं था, तो लाई क्यों नहीं?
जगधार-जो चीज घर में न रहे, उसकी फिकर रखनी चाहिए।
सुभागी-मैं क्या जानती थी कि आज आधी रात को प्याज की धुन सवार होगी।
भैरों ताड़ी के नशे में था। नशे में भी क्रोध का-सा गुण है,