औरत किस खेत की मूली है! मार से भूत भागता है।
बजरंगी-तो औरत भी भाग जाएगी, लेकिन काबू में न आएगी?
नायकराम-बहुत अच्छी कही बजरंगी, बहुत पक्की कही, वाह-वाह! मार से भूत भागता है, तो औरत भी भाग जाएगी। अब तो कट गई तुम्हारी बात?
भैरों-बात क्या कट जाएगी, दिल्लगी है? चूने को जितना ही कूटो, उतना ही चिमटता है।
जगधार-ये सब कहने की बातें हैं। औरत अपने मन से बस में आती है, और किसी तरह नहीं।
नायकराम-क्यों बजरंगी, नहीं है कोई जवाब?
औरत किस खेत की मूली है! मार से भूत भागता है।
बजरंगी-तो औरत भी भाग जाएगी, लेकिन काबू में न आएगी?
नायकराम-बहुत अच्छी कही बजरंगी, बहुत पक्की कही, वाह-वाह! मार से भूत भागता है, तो औरत भी भाग जाएगी। अब तो कट गई तुम्हारी बात?
भैरों-बात क्या कट जाएगी, दिल्लगी है? चूने को जितना ही कूटो, उतना ही चिमटता है।
जगधार-ये सब कहने की बातें हैं। औरत अपने मन से बस में आती है, और किसी तरह नहीं।
नायकराम-क्यों बजरंगी, नहीं है कोई जवाब?