रंगभूमि - Rangbhumi



ठाकुरदीन-पंडाजी, तुम दोनों को लड़ाकर तभी दम लोगे; बिचारे अपाहिज आदमी के पीछे पड़े हो।

नायकराम-तुम सूरदास को क्या समझते हो, यह देखने ही में इतने दुबले हैं। अभी हाथ मिलाओ, तो मालूम हो। भैरों, अगर इन्हें पछाड़ दो, तो पाँच रुपये इनाम दूँ।

भैरों-निकल जाओगे।

नायकराम-निकलनेवाले को कुछ कहता हूँ। यह देखो, ठाकुरदीन के हाथ में रखे देता हूँ।

जगधार-क्या ताकते हो भैरों, ले पड़ो।

सूरदास-मैं नहीं लड़ता।

नायकराम-सूरदास, देखो,


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ठाकुरदीन-पंडाजी, तुम दोनों को लड़ाकर तभी दम लोगे; बिचारे अपाहिज आदमी के पीछे पड़े हो।

नायकराम-तुम सूरदास को क्या समझते हो, यह देखने ही में इतने दुबले हैं। अभी हाथ मिलाओ, तो मालूम हो। भैरों, अगर इन्हें पछाड़ दो, तो पाँच रुपये इनाम दूँ।

भैरों-निकल जाओगे।

नायकराम-निकलनेवाले को कुछ कहता हूँ। यह देखो, ठाकुरदीन के हाथ में रखे देता हूँ।

जगधार-क्या ताकते हो भैरों, ले पड़ो।

सूरदास-मैं नहीं लड़ता।

नायकराम-सूरदास, देखो,


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