नाम-हँसाई मत कराओ। मर्द होकर लड़ने से डरते हो? हार ही जाओगे या और कुछ!
सूरदास-लेकिन भाई, मैं पेंच-पाच नहीं जानता। पीछे से यह न कहना, हाथ क्यों पकड़ा। मैं जैसे चाहूँगा, वैसे लड़ूँगा।
जगधार-हाँ-हाँ, तुम जैसे चाहना, वैसे लड़ना।
सूरदास-अच्छा तो आओ, कौन आता है!
नायकराम-अंधे आदमी का जीवट देखना। चलो भैरों, आओ मैदान में।
भैरों-अंधे से क्या लड़ूँगा!
नायकराम-बस, इसी पर इतना अकड़ते थे?
जगधार-निकल आओ भैरों, एक झपट्टे में तो मार लोगे!
नाम-हँसाई मत कराओ। मर्द होकर लड़ने से डरते हो? हार ही जाओगे या और कुछ!
सूरदास-लेकिन भाई, मैं पेंच-पाच नहीं जानता। पीछे से यह न कहना, हाथ क्यों पकड़ा। मैं जैसे चाहूँगा, वैसे लड़ूँगा।
जगधार-हाँ-हाँ, तुम जैसे चाहना, वैसे लड़ना।
सूरदास-अच्छा तो आओ, कौन आता है!
नायकराम-अंधे आदमी का जीवट देखना। चलो भैरों, आओ मैदान में।
भैरों-अंधे से क्या लड़ूँगा!
नायकराम-बस, इसी पर इतना अकड़ते थे?
जगधार-निकल आओ भैरों, एक झपट्टे में तो मार लोगे!