रंगभूमि - Rangbhumi



भैरों-तुम्हीं क्यों नहीं लड़ जाते, तुम्हीं इनाम ले लेना।

जगधार को रुपयों की नित्य चिंता रहती थी। परिवार बड़ा होने के कारण किसी तरह चूल न बैठती थी, घर में एक-न-एक चीज घटी ही रहती थी। धानोपार्जन के किसी उपाय को हाथ से न छोड़ना चाहता था। बोला-क्यों सूरे, हमसे लड़ोगे?

सूरदास-तुम्हीं आ जाओ, कोई सही।

जगधार-क्यों पंडाजी, इनाम दोगे न?

नायकराम-इनाम तो भैरों के लिए था, लेकिन कोई हरज नहीं! हाँ, शर्त यह है कि एक ही झपट्टे में गिरा दो।


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भैरों-तुम्हीं क्यों नहीं लड़ जाते, तुम्हीं इनाम ले लेना।

जगधार को रुपयों की नित्य चिंता रहती थी। परिवार बड़ा होने के कारण किसी तरह चूल न बैठती थी, घर में एक-न-एक चीज घटी ही रहती थी। धानोपार्जन के किसी उपाय को हाथ से न छोड़ना चाहता था। बोला-क्यों सूरे, हमसे लड़ोगे?

सूरदास-तुम्हीं आ जाओ, कोई सही।

जगधार-क्यों पंडाजी, इनाम दोगे न?

नायकराम-इनाम तो भैरों के लिए था, लेकिन कोई हरज नहीं! हाँ, शर्त यह है कि एक ही झपट्टे में गिरा दो।


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