जगधार-हाँ-हाँ, अबकी देखना।
दोनों योध्दाओं में फिर मल्ल-युध्द होने लगा। सूरदास ने अबकी जगधार का हाथ पकड़कर इतने जोर से ऐंठा कि वह 'आह! आह!' करता हुआ जमीन पर बैठ गया। सूरदास ने तुरंत उसका हाथ छोड़ दिया और गरदन पकड़कर दोनों हाथों से ऐसा दबोचा कि जगधार की ऑंखें निकल आईं; नायकराम ने दौड़कर सूरदास को हटा लिया। बजरंगी ने जगधार को उठाकर बिठाया और हवा करने लगा।
भैरों ने बिगड़कर कहा-यह कोई कुश्ती है कि जहाँ पकड़ पाया, वहीं धार दबाया। यह तो गँवारों की लड़ाई है,
जगधार-हाँ-हाँ, अबकी देखना।
दोनों योध्दाओं में फिर मल्ल-युध्द होने लगा। सूरदास ने अबकी जगधार का हाथ पकड़कर इतने जोर से ऐंठा कि वह 'आह! आह!' करता हुआ जमीन पर बैठ गया। सूरदास ने तुरंत उसका हाथ छोड़ दिया और गरदन पकड़कर दोनों हाथों से ऐसा दबोचा कि जगधार की ऑंखें निकल आईं; नायकराम ने दौड़कर सूरदास को हटा लिया। बजरंगी ने जगधार को उठाकर बिठाया और हवा करने लगा।
भैरों ने बिगड़कर कहा-यह कोई कुश्ती है कि जहाँ पकड़ पाया, वहीं धार दबाया। यह तो गँवारों की लड़ाई है,