तो सब स्वाहा हो गया।
जगधार-जिसके मन में इतनी खुटाई हो, भगवान उसका सत्यानाश कर दें।
सूरदास-अब तो लपट नहीं आती।
बजरंगी-हाँ, फूस जल गया, अब धारन जल रही है।
सूरदास-अब तो अंदर जा सकता हूँ?
नायकराम-अंदर तो जा सकते हो; पर बाहर नहीं निकल सकते। अब चलो आराम से सो रहो; जो होना था, हो गया। पछताने से क्या होगा?
सूरदास-हाँ, सो रहूँगा, जल्दी क्या है।
थोड़ी देर में रही-सही आग भी बुझ गई। कुशल यह हुई कि और किसी के घर में
तो सब स्वाहा हो गया।
जगधार-जिसके मन में इतनी खुटाई हो, भगवान उसका सत्यानाश कर दें।
सूरदास-अब तो लपट नहीं आती।
बजरंगी-हाँ, फूस जल गया, अब धारन जल रही है।
सूरदास-अब तो अंदर जा सकता हूँ?
नायकराम-अंदर तो जा सकते हो; पर बाहर नहीं निकल सकते। अब चलो आराम से सो रहो; जो होना था, हो गया। पछताने से क्या होगा?
सूरदास-हाँ, सो रहूँगा, जल्दी क्या है।
थोड़ी देर में रही-सही आग भी बुझ गई। कुशल यह हुई कि और किसी के घर में