रंगभूमि - Rangbhumi



सूरदास-किसी तरह नहीं जा सकता?

बजरंगी-कैसे जाओगे? देखते नहीं हो, यहाँ तक लपटें आ रही हैं!

जगधार-सूरे, क्या आज चूल्हा ठंडा नहीं किया था?

नायकराम-चूल्हा ठंडा किया होता, तो दुसमनों का कलेजा कैसे ठंडा होता।

जगधार-पंडाजी, मेरा लड़का काम न आए, अगर मुझे कुछ भी मालूम हो। तुम मुझ पर नाहक सुभा करते हो।

नायकराम-मैं जानता हूँ जिसने लगाई है। बिगाड़ न दूँ, तो कहना।

ठाकुरदीन-तुम क्या बिगाड़ोगे, भगवान आप ही बिगाड़ देंगे। इसी तरह जब मेरे घर में चोरी हुई थी,


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सूरदास-किसी तरह नहीं जा सकता?

बजरंगी-कैसे जाओगे? देखते नहीं हो, यहाँ तक लपटें आ रही हैं!

जगधार-सूरे, क्या आज चूल्हा ठंडा नहीं किया था?

नायकराम-चूल्हा ठंडा किया होता, तो दुसमनों का कलेजा कैसे ठंडा होता।

जगधार-पंडाजी, मेरा लड़का काम न आए, अगर मुझे कुछ भी मालूम हो। तुम मुझ पर नाहक सुभा करते हो।

नायकराम-मैं जानता हूँ जिसने लगाई है। बिगाड़ न दूँ, तो कहना।

ठाकुरदीन-तुम क्या बिगाड़ोगे, भगवान आप ही बिगाड़ देंगे। इसी तरह जब मेरे घर में चोरी हुई थी,


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