रंगभूमि - Rangbhumi



सूरदास-तुम्हारी तरफ से मेरा दिल साफ है।

जगधार को भैरों की बातों से अब यह विश्वास हो गया कि उसी की शरारत है। उसने सूरदास को रुलाने की बात कही थी। उस धमकी को इस तरह पूरा किया। वह वहाँ से सीधो भैरों के पास गया। वह चुपचाप बैठा नारियल का हुक्का पी रहा था, पर मुख से चिंता और घबराहट झलक रही थी। जगधार को देखते ही बोला-कुछ सुना; लोग क्या बातचीत कर रहे हैं?

जगधार-सब लोग तुम्हारे ऊपर सुभा करते हैं। नायकराम की धमकी तो तुमने अपने कानों से सुनी।


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सूरदास-तुम्हारी तरफ से मेरा दिल साफ है।

जगधार को भैरों की बातों से अब यह विश्वास हो गया कि उसी की शरारत है। उसने सूरदास को रुलाने की बात कही थी। उस धमकी को इस तरह पूरा किया। वह वहाँ से सीधो भैरों के पास गया। वह चुपचाप बैठा नारियल का हुक्का पी रहा था, पर मुख से चिंता और घबराहट झलक रही थी। जगधार को देखते ही बोला-कुछ सुना; लोग क्या बातचीत कर रहे हैं?

जगधार-सब लोग तुम्हारे ऊपर सुभा करते हैं। नायकराम की धमकी तो तुमने अपने कानों से सुनी।


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