रंगभूमि - Rangbhumi

तो ठाकुरजी के प्रसाद ही से पेट भर जाए।

सूरदास-तुम्हीं लोगों का दिया खाता है या और किसी का? मैं तो बनाने-भर को हूँ।

जगधार-लड़कों को इतना सिर चढ़ाना अच्छा नहीं। गोद में लादे फिरते हो, जैसे नन्हा-सा बालक हो। मेरा विद्याधार इससे दो साल छोटा है। मैं उसे कभी गोद में लेकर नहीं फिरता।

सूरदास-बिना माँ-बाप के लड़के हठी हो जाते हैं। हाँ, क्या होगा?

दयागिरि-पहले रामायण की एक चौपाई हो जाए।

लोगों ने अपने-अपने साज सँभाले। सुर मिला और आधा घंटे तक रामायण हुई।


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तो ठाकुरजी के प्रसाद ही से पेट भर जाए।

सूरदास-तुम्हीं लोगों का दिया खाता है या और किसी का? मैं तो बनाने-भर को हूँ।

जगधार-लड़कों को इतना सिर चढ़ाना अच्छा नहीं। गोद में लादे फिरते हो, जैसे नन्हा-सा बालक हो। मेरा विद्याधार इससे दो साल छोटा है। मैं उसे कभी गोद में लेकर नहीं फिरता।

सूरदास-बिना माँ-बाप के लड़के हठी हो जाते हैं। हाँ, क्या होगा?

दयागिरि-पहले रामायण की एक चौपाई हो जाए।

लोगों ने अपने-अपने साज सँभाले। सुर मिला और आधा घंटे तक रामायण हुई।


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