नायकराम-वाह सूरदास वाह! अब तुम्हारे ही दम का जलूसा है।
बजरंगी-मेरी तो कोई दोनों ऑंखें ले ले, और यह हुनर मुझे दे दे, तो मैं खुशी से बदल लूँ।
जगधार-अभी भैरों नहीं आया, उसके बिना रंग नहीं जमता।
बजरंगी-ताड़ी बेचता होगा। पैसे का लोभ बुरा होता है। घर में एक मेहरिया है और एक बुढ़िया माँ। मुआ रात-दिन हाय-हाय पड़ी रहती है। काम करने को तो दिन है ही, भला रात को तो भगवान् का भजन हो जाए।
जगधार-सूरे का दम उखड़ जाता है, उसका दम नहीं उखड़ता।
नायकराम-वाह सूरदास वाह! अब तुम्हारे ही दम का जलूसा है।
बजरंगी-मेरी तो कोई दोनों ऑंखें ले ले, और यह हुनर मुझे दे दे, तो मैं खुशी से बदल लूँ।
जगधार-अभी भैरों नहीं आया, उसके बिना रंग नहीं जमता।
बजरंगी-ताड़ी बेचता होगा। पैसे का लोभ बुरा होता है। घर में एक मेहरिया है और एक बुढ़िया माँ। मुआ रात-दिन हाय-हाय पड़ी रहती है। काम करने को तो दिन है ही, भला रात को तो भगवान् का भजन हो जाए।
जगधार-सूरे का दम उखड़ जाता है, उसका दम नहीं उखड़ता।