रंगभूमि - Rangbhumi

वह खुद मुझसे कह रहा था। रुपयों की थैली लाकर दिखाई। इससे बढ़कर और क्या सबूत होगा?

प्रभु सेवक-भैरों के मुँह पर कहोगे?

जगधार-नहीं सरकार, खून हो जाएगा।

सहसा भैरों सिर पर ताड़ी का घड़ा रखे आता हुआ दिखाई दिया। जगधार ने तुरंत खोंचा उठाया, बिना पैसे लिए कदम बढ़ाता हुआ दूसरी तरफ चल दिया। भैरों ने समीप आकर सलाम किया। प्रभु सेवक ने ऑंखें दिखाकर पूछा-तू ही भैरों ताड़ीवाला है न?

भैरों-(काँपते हुए) हाँ हुजूर, मेरा ही नाम भैरों है।


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वह खुद मुझसे कह रहा था। रुपयों की थैली लाकर दिखाई। इससे बढ़कर और क्या सबूत होगा?

प्रभु सेवक-भैरों के मुँह पर कहोगे?

जगधार-नहीं सरकार, खून हो जाएगा।

सहसा भैरों सिर पर ताड़ी का घड़ा रखे आता हुआ दिखाई दिया। जगधार ने तुरंत खोंचा उठाया, बिना पैसे लिए कदम बढ़ाता हुआ दूसरी तरफ चल दिया। भैरों ने समीप आकर सलाम किया। प्रभु सेवक ने ऑंखें दिखाकर पूछा-तू ही भैरों ताड़ीवाला है न?

भैरों-(काँपते हुए) हाँ हुजूर, मेरा ही नाम भैरों है।


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