में आबरू बनी रहनी चाहिए। आदमियों की निगाह में आबरू की परख कहाँ है। जब सूद खानेवाला बनिया, घूस लेनेवाला हाकिम और झूठ बोलनेवाला गवाह बेआबरू नहीं समझा जाता, लोग उसका आदर-मान करते हैं, तो यहाँ सच्ची आबरू की कदर करने वाला कोई है ही नहीं।
बजरंगी-तुमसे कुछ मतलब नहीं, हम लोग जो चाहेंगे, करेंगे।
सूरदास-अगर मेरी बात न मानोगे, तो मैं जाके साहब से सारा माजरा कह सुनाऊँगा।
नायकराम-अगर तुमने उधार पैर रखा, तो याद रखना, वहीं खोदकर
में आबरू बनी रहनी चाहिए। आदमियों की निगाह में आबरू की परख कहाँ है। जब सूद खानेवाला बनिया, घूस लेनेवाला हाकिम और झूठ बोलनेवाला गवाह बेआबरू नहीं समझा जाता, लोग उसका आदर-मान करते हैं, तो यहाँ सच्ची आबरू की कदर करने वाला कोई है ही नहीं।
बजरंगी-तुमसे कुछ मतलब नहीं, हम लोग जो चाहेंगे, करेंगे।
सूरदास-अगर मेरी बात न मानोगे, तो मैं जाके साहब से सारा माजरा कह सुनाऊँगा।
नायकराम-अगर तुमने उधार पैर रखा, तो याद रखना, वहीं खोदकर