रंगभूमि - Rangbhumi

और शराब-ताड़ी का पूछना ही क्या, चाहो तो पानी को शराब बनाकर बेचो। गाड़ीवालों की मजदूरी बढ़ जाएगी। यही मोहल्ला चौक की भाँति गुलजार हो जाएगा। तुम्हारे लड़के अभी शहर पढ़ने जाते हैं, तब यहीं मदरसा खुल जाएगा।

जगधार-क्या यहाँ मदरसा भी खुलेगा?

जॉन सेवक-हाँ, कारखाने के आदमियों के लड़के आखिर पढ़ने कहाँ जाएँगे? अंगरेजी भी पढ़ाई जाएगी।

जगधर-फीस कुछ कम ली जाएगी?

जॉन सेवक-फीस बिलकुल ही न ली जाएगी, कम-ज्यादा कैसी!

जगधार-तब तो बड़ा आराम हो जाएगा।


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और शराब-ताड़ी का पूछना ही क्या, चाहो तो पानी को शराब बनाकर बेचो। गाड़ीवालों की मजदूरी बढ़ जाएगी। यही मोहल्ला चौक की भाँति गुलजार हो जाएगा। तुम्हारे लड़के अभी शहर पढ़ने जाते हैं, तब यहीं मदरसा खुल जाएगा।

जगधार-क्या यहाँ मदरसा भी खुलेगा?

जॉन सेवक-हाँ, कारखाने के आदमियों के लड़के आखिर पढ़ने कहाँ जाएँगे? अंगरेजी भी पढ़ाई जाएगी।

जगधर-फीस कुछ कम ली जाएगी?

जॉन सेवक-फीस बिलकुल ही न ली जाएगी, कम-ज्यादा कैसी!

जगधार-तब तो बड़ा आराम हो जाएगा।


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