नायकराम-जिसका माल है, उसे क्या मलेगा?
जॉन सेवक-जो तुम लोग तय कर दो। मैं तुम्हीं को पंच मानता हूँ। बस, उसे राजी करना तुम्हारा काम है।
नायकराम-वह राजी ही है। आपने बात-की-बात में सबको राजी कर लिया, नहीं तो यहाँ लोग मन में न जाने क्या-क्या समझे बैठे थे। सच है, विद्या बड़ी चीज है।
भैरों-वहाँ ताड़ी की दूकान के लिए कुछ देना तो न पड़ेगा?
नायकराम-कोई और खड़ा हो गया, तो चढ़ा-ऊपरी होगी ही।
जॉन सेवक-नहीं, तुम्हारा हक सबसे बढ़कर समझा जाएगा।
नायकराम-जिसका माल है, उसे क्या मलेगा?
जॉन सेवक-जो तुम लोग तय कर दो। मैं तुम्हीं को पंच मानता हूँ। बस, उसे राजी करना तुम्हारा काम है।
नायकराम-वह राजी ही है। आपने बात-की-बात में सबको राजी कर लिया, नहीं तो यहाँ लोग मन में न जाने क्या-क्या समझे बैठे थे। सच है, विद्या बड़ी चीज है।
भैरों-वहाँ ताड़ी की दूकान के लिए कुछ देना तो न पड़ेगा?
नायकराम-कोई और खड़ा हो गया, तो चढ़ा-ऊपरी होगी ही।
जॉन सेवक-नहीं, तुम्हारा हक सबसे बढ़कर समझा जाएगा।