रंगभूमि - Rangbhumi



नायकराम-तो फिर तुम्हारी चाँदी है भैरों!

जॉन सेवक-तो अब मैं चलूँ पंडाजी, अब आपके दिल में मलाल तो नहीं है?

नायकराम-अब कुछ कहलाइए न, आपका-सा भलामानुस आदमी कम देखा।

जॉन सेवक चले गए तो बजरंगी ने कहा-कहीं सूरे राजी न हुए, तो?

नायकराम-हम तो राजी करेंगे! चार हजार रुपये दिलाने चाहिए। अब इसी समझौते में कुशल है। जमीन रह नहीं सकती। यह आदमी इतना चतुर है कि इससे हम लोग पेस नहीं पा सकते। यों निकल जाएगी तो हमारे साथ यह सलूक कौन करेगा? सेंत में जस मिलता हो,


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नायकराम-तो फिर तुम्हारी चाँदी है भैरों!

जॉन सेवक-तो अब मैं चलूँ पंडाजी, अब आपके दिल में मलाल तो नहीं है?

नायकराम-अब कुछ कहलाइए न, आपका-सा भलामानुस आदमी कम देखा।

जॉन सेवक चले गए तो बजरंगी ने कहा-कहीं सूरे राजी न हुए, तो?

नायकराम-हम तो राजी करेंगे! चार हजार रुपये दिलाने चाहिए। अब इसी समझौते में कुशल है। जमीन रह नहीं सकती। यह आदमी इतना चतुर है कि इससे हम लोग पेस नहीं पा सकते। यों निकल जाएगी तो हमारे साथ यह सलूक कौन करेगा? सेंत में जस मिलता हो,


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