ईश्वर सेवक-या खुदा, इस खानदान पर अपना साया फैला। बेटा, ऐसी बातें जबान से न निकालो। मसीह का दास कभी सन्मार्ग से नहीं फिर सकता। उस पर प्रभु मसीह की दयादृष्टि रहती है।
जॉन सेवक-(स्त्री से) तुम कल सुबह चली जाओ, रानी से भेंट भी हो जाएगी और सोफी को भी लेती आओगी।
मिसेज़ सेवक-अब जाना ही पड़ेगा। जी तो न हीं चाहता; पर जाऊँगी। उसी की टेक रहे!
सूरदास संध्या समय घर आया, और सब समाचार सुने, तो नायकराम से बोला-तुमने मेरी जमीन साहब को दे दी?
ईश्वर सेवक-या खुदा, इस खानदान पर अपना साया फैला। बेटा, ऐसी बातें जबान से न निकालो। मसीह का दास कभी सन्मार्ग से नहीं फिर सकता। उस पर प्रभु मसीह की दयादृष्टि रहती है।
जॉन सेवक-(स्त्री से) तुम कल सुबह चली जाओ, रानी से भेंट भी हो जाएगी और सोफी को भी लेती आओगी।
मिसेज़ सेवक-अब जाना ही पड़ेगा। जी तो न हीं चाहता; पर जाऊँगी। उसी की टेक रहे!
सूरदास संध्या समय घर आया, और सब समाचार सुने, तो नायकराम से बोला-तुमने मेरी जमीन साहब को दे दी?