रंगभूमि - Rangbhumi



नायकराम-मैंने क्यों दी? मुझसे वास्ता?

सूरदास-मैं तो तुम्हीं को सब कुछ समझता था और तुम्हारे ही बल पर कूदता था, पर आज तुमने भी साथ छोड़ दिया। अच्छी बात है। मेरी भूल थी कि तुम्हारे बल पर फूला हुआ था। यह उसी की सजा है। अब न्याय के बल पर लड़ूँगा, भगवान ही का भरोसा करूँगा।

नायकराम-बजरंगी, जरा भैरों को बुला लो, इन्हें सब बातें समझा दें। मैं इनसे कहाँ तक मगज लगाऊँ।

बजरंगी-भैरों को क्यों बुला लँ, क्या मैं इतना भी नहीं कर सकता। भैरों को इतना सिर चढ़ा दिया,


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नायकराम-मैंने क्यों दी? मुझसे वास्ता?

सूरदास-मैं तो तुम्हीं को सब कुछ समझता था और तुम्हारे ही बल पर कूदता था, पर आज तुमने भी साथ छोड़ दिया। अच्छी बात है। मेरी भूल थी कि तुम्हारे बल पर फूला हुआ था। यह उसी की सजा है। अब न्याय के बल पर लड़ूँगा, भगवान ही का भरोसा करूँगा।

नायकराम-बजरंगी, जरा भैरों को बुला लो, इन्हें सब बातें समझा दें। मैं इनसे कहाँ तक मगज लगाऊँ।

बजरंगी-भैरों को क्यों बुला लँ, क्या मैं इतना भी नहीं कर सकता। भैरों को इतना सिर चढ़ा दिया,


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