कुछ नहीं...मुझसे एक अपराध हो गया है, आपसे क्षमा माँगती हूँ।
रानी ने और भी तीव्र स्वर में पूछा-क्या बात है?
सोफी-आज जब आप सैर करने गई थीं, तो मैं आपके कमरे में चली गई थी।
रानी-क्या काम था?
सोफी लज्जा से आरक्त होकर बोली-मैंने आपकी कोई चीज नहीं छुई।
रानी-मैं तुम्हें इतना नीच नहीं समझती।
सोफी-एक पत्र देखना था।
रानी-विनयसिंह का?
सोफ़िया ने सिर झुका लिया। वह अपनी दृष्टि में स्वयं इतनी पतित हो गई थी कि जी चाहता था,
कुछ नहीं...मुझसे एक अपराध हो गया है, आपसे क्षमा माँगती हूँ।
रानी ने और भी तीव्र स्वर में पूछा-क्या बात है?
सोफी-आज जब आप सैर करने गई थीं, तो मैं आपके कमरे में चली गई थी।
रानी-क्या काम था?
सोफी लज्जा से आरक्त होकर बोली-मैंने आपकी कोई चीज नहीं छुई।
रानी-मैं तुम्हें इतना नीच नहीं समझती।
सोफी-एक पत्र देखना था।
रानी-विनयसिंह का?
सोफ़िया ने सिर झुका लिया। वह अपनी दृष्टि में स्वयं इतनी पतित हो गई थी कि जी चाहता था,