किंतु सेवकों को विदा करने के लिए स्टेशन पर जाना जरूरी था। जाह्नवी ने उसे बहुत आग्रह करके बुलाया था। वह जाने को तैयार ही थी कि राजा साहब अंदर आए और इंदु को कहीं जाने को तैयार देखकर बोले-कहाँ जाती हो, बादल घिरा हुआ है।
इंदु-समिति के लोग गढ़वाल जा रहे हैं। उन्हें विदा करने स्टेशन जा रही हूँ। अम्माँजी ने बुलाया भी है।
राजा-पानी अवश्य बरसेगा।
इंदु-परदा डाल दूँगी; और भीग भी गई, तो क्या? आखिर वे भी तो आदमी ही हैं, जो लोक-सेवा के लिए इतनी दूर जा रहे हैं।
किंतु सेवकों को विदा करने के लिए स्टेशन पर जाना जरूरी था। जाह्नवी ने उसे बहुत आग्रह करके बुलाया था। वह जाने को तैयार ही थी कि राजा साहब अंदर आए और इंदु को कहीं जाने को तैयार देखकर बोले-कहाँ जाती हो, बादल घिरा हुआ है।
इंदु-समिति के लोग गढ़वाल जा रहे हैं। उन्हें विदा करने स्टेशन जा रही हूँ। अम्माँजी ने बुलाया भी है।
राजा-पानी अवश्य बरसेगा।
इंदु-परदा डाल दूँगी; और भीग भी गई, तो क्या? आखिर वे भी तो आदमी ही हैं, जो लोक-सेवा के लिए इतनी दूर जा रहे हैं।