राजा-न जाओ, तो कोई हरज है? स्टेशन पर भीड़ बहुत होगी।
इंदु-हरज क्या होगा, मैं जाऊँ या न जाऊँ; वे लोग तो जाएँगे ही, पर दिल नहीं मानता। वे लोग घर-बार छोड़कर जा रहे हैं, न जाने क्या-क्या कष्ट उठाएँगे, न जाने कब लौटेंगे, मुझसे इतना भी न हो कि उन्हें विदा कर आऊँ? आप भी क्यों नहीं चलते?
राजा-(विस्मित होकर) मैं?
इंदु-हाँ-हाँ, आपके जाने में कोई हरज है?
राजा-मैं ऐसी संस्थाओं में सम्मिलित नहीं होता!
इंदु-कैसी संस्थाओं में?
राजा-न जाओ, तो कोई हरज है? स्टेशन पर भीड़ बहुत होगी।
इंदु-हरज क्या होगा, मैं जाऊँ या न जाऊँ; वे लोग तो जाएँगे ही, पर दिल नहीं मानता। वे लोग घर-बार छोड़कर जा रहे हैं, न जाने क्या-क्या कष्ट उठाएँगे, न जाने कब लौटेंगे, मुझसे इतना भी न हो कि उन्हें विदा कर आऊँ? आप भी क्यों नहीं चलते?
राजा-(विस्मित होकर) मैं?
इंदु-हाँ-हाँ, आपके जाने में कोई हरज है?
राजा-मैं ऐसी संस्थाओं में सम्मिलित नहीं होता!
इंदु-कैसी संस्थाओं में?