रंगभूमि - Rangbhumi



इंदु-जरा गौर से देखो।

कोचवान-क्या देखूँ हुजूर, वह आ पहुँची, सरकार बैठे हैं।

इंदु-ख्वाब तो नहीं देख रहा है!

कोचवान-लीजिए, हुजूर, यह बराबर आ गई।

इंदु ने घबराकर बाहर देखा, तो सचमुच अपनी ही मोटर थी। गाड़ी के बराबर आकर रुक गई और राजा साहब उतर पड़े कोचवान ने गाड़ी रोक दी। इंदु चकित होकर बोली-आप कब आ गए?

राजा-तुम्हारे आने के पाँच मिनट बाद मैं भी चल पड़ा।

इंदु-रास्ते में तो कहीं नहीं दिखाई दिए।

राजा-लाइन की तरफ से आया हूँ। इधार की सड़क खराब है। मैंने समझा,


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इंदु-जरा गौर से देखो।

कोचवान-क्या देखूँ हुजूर, वह आ पहुँची, सरकार बैठे हैं।

इंदु-ख्वाब तो नहीं देख रहा है!

कोचवान-लीजिए, हुजूर, यह बराबर आ गई।

इंदु ने घबराकर बाहर देखा, तो सचमुच अपनी ही मोटर थी। गाड़ी के बराबर आकर रुक गई और राजा साहब उतर पड़े कोचवान ने गाड़ी रोक दी। इंदु चकित होकर बोली-आप कब आ गए?

राजा-तुम्हारे आने के पाँच मिनट बाद मैं भी चल पड़ा।

इंदु-रास्ते में तो कहीं नहीं दिखाई दिए।

राजा-लाइन की तरफ से आया हूँ। इधार की सड़क खराब है। मैंने समझा,


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