रंगभूमि - Rangbhumi



कोचवान-हुजूर, कोई गाड़ी तो आ रही।

इंदु-घोड़ों को तेज कर दो, चौगाम छोड़ दो।

कोचवान-हुजूर, गाड़ी नहीं, मोटर है, साफ मोटर है।

इंदु-घोड़ों को चाबुक लगाओ।

कोचवान-हुजूर, यह तो अपनी ही मोटर मालूम होती है, हींगनसिंह चला रहे हैं। खूब पहचान गया, अपनी ही मोटर है।

इंदु-पागल हो, अपनी मोटर यहाँ क्यों आने लगी?

कोचवान-हुजूर, अपनी मोटर न हो, तो जो चोर की सजा, वह मेरी। साफ़ नजर आ रही है, वही रंग है। ऐसी मोटर इस शहर में दूसरी है ही नहीं।


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कोचवान-हुजूर, कोई गाड़ी तो आ रही।

इंदु-घोड़ों को तेज कर दो, चौगाम छोड़ दो।

कोचवान-हुजूर, गाड़ी नहीं, मोटर है, साफ मोटर है।

इंदु-घोड़ों को चाबुक लगाओ।

कोचवान-हुजूर, यह तो अपनी ही मोटर मालूम होती है, हींगनसिंह चला रहे हैं। खूब पहचान गया, अपनी ही मोटर है।

इंदु-पागल हो, अपनी मोटर यहाँ क्यों आने लगी?

कोचवान-हुजूर, अपनी मोटर न हो, तो जो चोर की सजा, वह मेरी। साफ़ नजर आ रही है, वही रंग है। ऐसी मोटर इस शहर में दूसरी है ही नहीं।


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