गाड़ी पहचानते हैं।
इंदु-कुछ परवा नहीं, फौरन घोड़े फेर दो।
कोचवान-क्या सरकार की तबीयत कुछ खराब हो गई क्या?
इंदु-बक-बक मत करो, गाड़ी लौटा ले चलो।
कोचवान ने गाड़ी फेड़ दी। इंदु ने एक लम्बी साँस ली और सोचने लगी-सब लोग मेरा इंतजार कर रहे होंगे; गाड़ी देखते ही पहचान गए थे। अम्माँ कितनी खुश हुई होंगी; पर गाड़ी लौटते देखकर उन्हें और अन्य सब आदमियों को कितना विस्मय हुआ होगा! कोचवान से कहा-जरा पीछे फिरकर देखो, कोई आ तो नहीं रहा है?
गाड़ी पहचानते हैं।
इंदु-कुछ परवा नहीं, फौरन घोड़े फेर दो।
कोचवान-क्या सरकार की तबीयत कुछ खराब हो गई क्या?
इंदु-बक-बक मत करो, गाड़ी लौटा ले चलो।
कोचवान ने गाड़ी फेड़ दी। इंदु ने एक लम्बी साँस ली और सोचने लगी-सब लोग मेरा इंतजार कर रहे होंगे; गाड़ी देखते ही पहचान गए थे। अम्माँ कितनी खुश हुई होंगी; पर गाड़ी लौटते देखकर उन्हें और अन्य सब आदमियों को कितना विस्मय हुआ होगा! कोचवान से कहा-जरा पीछे फिरकर देखो, कोई आ तो नहीं रहा है?