भैरों-सेंधा मारो तुम; यहाँ दूध में पानी नहीं मिलाते।
दयागिरि-भैरों, तुम सचमुच बड़े झगड़ालू हो। जब तुम्हें प्रियवचन बोलना नहीं आता, तो चुप क्यों नहीं रहते? बहुत बातें करना बुध्दिमानी का लक्षण नहीं, मूर्खता का लक्षण है।
भैरों-ठाकुरजी के भोग के बहाने से रोज छाछ पा जाते हो न? बजरंगी की जय क्यों न मनाओगे!
नायकराम-पट्ठा बात बेलाग कहता है कि एक बार सुनकर फिर किसी की जबान नहीं खुलती।
ठाकुरदीन-अब भजन-भाव हो चुका। ढोल-मँजीरा उठाकर रख दो।
भैरों-सेंधा मारो तुम; यहाँ दूध में पानी नहीं मिलाते।
दयागिरि-भैरों, तुम सचमुच बड़े झगड़ालू हो। जब तुम्हें प्रियवचन बोलना नहीं आता, तो चुप क्यों नहीं रहते? बहुत बातें करना बुध्दिमानी का लक्षण नहीं, मूर्खता का लक्षण है।
भैरों-ठाकुरजी के भोग के बहाने से रोज छाछ पा जाते हो न? बजरंगी की जय क्यों न मनाओगे!
नायकराम-पट्ठा बात बेलाग कहता है कि एक बार सुनकर फिर किसी की जबान नहीं खुलती।
ठाकुरदीन-अब भजन-भाव हो चुका। ढोल-मँजीरा उठाकर रख दो।