रंगभूमि - Rangbhumi



दयागिरि-तुम कल से यहाँ न आया करो, भैरों।

भैरों-क्यों न आया करें? मंदिर तुम्हारा बनवाया नहीं है। मंदिर भगवान् का है। तुम किसी को भगवान् के दरबार में आने से रोक दोगे?

नायकराम-लो बाबाजी, और लोगे, अभी पेट भरा कि नहीं?

जगधार-बाबाजी, तुम्हीं गम खा जाओ, इससे साधु-संतों की महिमा नहीं घटती। भैरों, साधु-संतों की बात का तुम्हें बुरा न मानना चाहिए।

भैरों-तुम खुशामद करो, क्योंकि खुशामद की रोटियाँ खाते हो। यहाँ किसी के दबैल नहीं हैं।


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दयागिरि-तुम कल से यहाँ न आया करो, भैरों।

भैरों-क्यों न आया करें? मंदिर तुम्हारा बनवाया नहीं है। मंदिर भगवान् का है। तुम किसी को भगवान् के दरबार में आने से रोक दोगे?

नायकराम-लो बाबाजी, और लोगे, अभी पेट भरा कि नहीं?

जगधार-बाबाजी, तुम्हीं गम खा जाओ, इससे साधु-संतों की महिमा नहीं घटती। भैरों, साधु-संतों की बात का तुम्हें बुरा न मानना चाहिए।

भैरों-तुम खुशामद करो, क्योंकि खुशामद की रोटियाँ खाते हो। यहाँ किसी के दबैल नहीं हैं।


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