यह इसलिए पूछता हूँ कि तुमने अभी मुझे यह धमकी दी है।
इंदु-मैं चुपचाप न बैठूँगी। आप दबें, मैं क्यों दबूँ?
राजा साहब-चाहे मेरी कितनी ही बदनामी हो जाए?
इंदु-मैं इसे बदनामी नहीं समझती।
राजा साहब-फिर सोच लो। यह मानी हुई बात है कि वह जमीन मि. सेवक को अवश्य मिलेगी। मैं रोकना भी चाहूँ, तो नहीं रोक सकता,और यह भी मानी हुई बात है कि इस विषय में तुम्हें मौनव्रत का पालन करना पड़ेगा।
राजा साहब अपने सार्वजनिक जीवन में अपनी
यह इसलिए पूछता हूँ कि तुमने अभी मुझे यह धमकी दी है।
इंदु-मैं चुपचाप न बैठूँगी। आप दबें, मैं क्यों दबूँ?
राजा साहब-चाहे मेरी कितनी ही बदनामी हो जाए?
इंदु-मैं इसे बदनामी नहीं समझती।
राजा साहब-फिर सोच लो। यह मानी हुई बात है कि वह जमीन मि. सेवक को अवश्य मिलेगी। मैं रोकना भी चाहूँ, तो नहीं रोक सकता,और यह भी मानी हुई बात है कि इस विषय में तुम्हें मौनव्रत का पालन करना पड़ेगा।
राजा साहब अपने सार्वजनिक जीवन में अपनी