रंगभूमि - Rangbhumi



दूसरा सवार-तुम तो इधार के रहनेवाले नहीं जान पड़ते। क्यों बे डाकिए, यह कौन हैं?

डाकिया-यह तो नहीं जानता, पर इनका नाम है विनयसिंह। धार्मात्मा और परोपकारी आदमी हैं। कई महीनों से इस इलाके में ठहरे हुए हैं।

विनय का नाम सुनते ही पाँचों सवार घोड़ों से कूद पड़े और विनय के सामने हाथ बाँधकर खड़े हो गए। सरदार ने कहा-महाराज, हमारा अपराध क्षमा कीजिए। हमने आपका नाम सुना है। आज आपके दर्शन पाकर हमारा जीवन सफल हो गया। इस इलाके में


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दूसरा सवार-तुम तो इधार के रहनेवाले नहीं जान पड़ते। क्यों बे डाकिए, यह कौन हैं?

डाकिया-यह तो नहीं जानता, पर इनका नाम है विनयसिंह। धार्मात्मा और परोपकारी आदमी हैं। कई महीनों से इस इलाके में ठहरे हुए हैं।

विनय का नाम सुनते ही पाँचों सवार घोड़ों से कूद पड़े और विनय के सामने हाथ बाँधकर खड़े हो गए। सरदार ने कहा-महाराज, हमारा अपराध क्षमा कीजिए। हमने आपका नाम सुना है। आज आपके दर्शन पाकर हमारा जीवन सफल हो गया। इस इलाके में


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