रंगभूमि - Rangbhumi



विनय-जब तक मेरी हड्डीयां तुम्हारे घोड़ों के पैरों-तले न रौंदी जाएँगी, मैं सामने से न हटूँगा।

सवार-हम कहते हैं, सामने से हट जाओ। क्यों हमारे सिर हत्या का पाप लगाते हो?

विनय-मेरा जो धर्म है, वह मैं करता हूँ; तुम्हारा जो धर्म हो, वह तुम करो। गरदन झुकाए हुए हूँ।

दूसरा सवार-तुम कौन हो?

तीसरा सवार-बेधा हुआ है, मार दो एक हाथ, गिर पड़े, प्रायश्चित्त कर लेंगे।

पहला सवार-आखिर तुम हो कौन?

विनय-मैं कोई हूँ, तुम्हें इससे मतलब?


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विनय-जब तक मेरी हड्डीयां तुम्हारे घोड़ों के पैरों-तले न रौंदी जाएँगी, मैं सामने से न हटूँगा।

सवार-हम कहते हैं, सामने से हट जाओ। क्यों हमारे सिर हत्या का पाप लगाते हो?

विनय-मेरा जो धर्म है, वह मैं करता हूँ; तुम्हारा जो धर्म हो, वह तुम करो। गरदन झुकाए हुए हूँ।

दूसरा सवार-तुम कौन हो?

तीसरा सवार-बेधा हुआ है, मार दो एक हाथ, गिर पड़े, प्रायश्चित्त कर लेंगे।

पहला सवार-आखिर तुम हो कौन?

विनय-मैं कोई हूँ, तुम्हें इससे मतलब?


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