थैले के आर-पार हो गया। वह दूसरा वार करनेवाला ही था कि विनय सामने आकर बोले-भाइयो, यह क्या अंधोर करते हो! क्या थोड़े-से रुपयों के लिए एक गरीब की जान ले लोगे?
सवार-जान इतनी प्यारी है, तो रुपये क्यों नहीं देता?
विनय-जान भी प्यारी है और रुपये भी प्यारे हैं। दो में से एक भी नहीं दे सकता।
सवार-तो दोनों ही देने पड़ेंगे।
विनय-तो पहले मेरा काम तमाम कर दो। जब तक मैं हूँ, तुम्हारा मनोरथ न पूरा होगा।
सवार-हम साधु-संतों पर हाथ नहीं उठाते। सामने से हट जाओ।
थैले के आर-पार हो गया। वह दूसरा वार करनेवाला ही था कि विनय सामने आकर बोले-भाइयो, यह क्या अंधोर करते हो! क्या थोड़े-से रुपयों के लिए एक गरीब की जान ले लोगे?
सवार-जान इतनी प्यारी है, तो रुपये क्यों नहीं देता?
विनय-जान भी प्यारी है और रुपये भी प्यारे हैं। दो में से एक भी नहीं दे सकता।
सवार-तो दोनों ही देने पड़ेंगे।
विनय-तो पहले मेरा काम तमाम कर दो। जब तक मैं हूँ, तुम्हारा मनोरथ न पूरा होगा।
सवार-हम साधु-संतों पर हाथ नहीं उठाते। सामने से हट जाओ।