मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

की पुस्तकें नहीं पढ़ सकते थे। पिछले एक प्रकरण में इसका उल्लेख किया है। उसके पश्चात् हम दस-पांच लोगों ने कमिश्नर तक यह प्रार्थना की कि हमें एक-दूसरे की पुस्तकें पढ़ने की अनुमति दी जाए। परंतु बारी का कहना था- इन्हें एक-दूसरे की पुस्तकें पढ़ने की अनुज्ञा देते ही एक-दूसरे ने पुस्तकें फाड़ डाली, इस बहाने से


वे एक-दूसरे से झगड़ते रहेंगे और पुस्तक पर पेंसिल से चिट्टियां लिखकर आपस में पत्र-व्यवहार करते रहेंगे। मानो आपसी पत्र-व्यवहार


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की पुस्तकें नहीं पढ़ सकते थे। पिछले एक प्रकरण में इसका उल्लेख किया है। उसके पश्चात् हम दस-पांच लोगों ने कमिश्नर तक यह प्रार्थना की कि हमें एक-दूसरे की पुस्तकें पढ़ने की अनुमति दी जाए। परंतु बारी का कहना था- इन्हें एक-दूसरे की पुस्तकें पढ़ने की अनुज्ञा देते ही एक-दूसरे ने पुस्तकें फाड़ डाली, इस बहाने से


वे एक-दूसरे से झगड़ते रहेंगे और पुस्तक पर पेंसिल से चिट्टियां लिखकर आपस में पत्र-व्यवहार करते रहेंगे। मानो आपसी पत्र-व्यवहार


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