उतनी शिक्षा का कार्य हमें करते रहना होगा।’
इस प्रकार प्रयत्नरत रहते हुए दीन-हीन पतितों में कई ऐसे उदारमना निकले कि उनकी निस्स्वार्थ परोपकारी बुद्वि का, स्वच्छ आचरण का तथा देशहित साधने का प्रभाव देखकर हम राजबंदियों को भी आत्मश्लाघा के लिए लज्जा का अनुभव होने लगता।
राजबंदी बंदीवानों की पुस्तकादि शिक्षा-सामग्री का यह सब प्रबंध करते थे, साथ ही राजबंदियों के लिए भी एक ग्रंथालय खोलने का प्रयास कर रहे थे। प्रथमतः हम एक-दूसरे
उतनी शिक्षा का कार्य हमें करते रहना होगा।’
इस प्रकार प्रयत्नरत रहते हुए दीन-हीन पतितों में कई ऐसे उदारमना निकले कि उनकी निस्स्वार्थ परोपकारी बुद्वि का, स्वच्छ आचरण का तथा देशहित साधने का प्रभाव देखकर हम राजबंदियों को भी आत्मश्लाघा के लिए लज्जा का अनुभव होने लगता।
राजबंदी बंदीवानों की पुस्तकादि शिक्षा-सामग्री का यह सब प्रबंध करते थे, साथ ही राजबंदियों के लिए भी एक ग्रंथालय खोलने का प्रयास कर रहे थे। प्रथमतः हम एक-दूसरे