उस ग्रंथालय में बंगला भाषा के राजा राममोहन राय, विद्यासागर आदि महापुरूषों के चरित्र, नवीन सेन राय, रवींद्रनाथ आदि के प्रायः सभी गं्रथ, जोगेश चंद्र आदि की गं्रथावलियां, ‘संपूर्ण महाभारत’, ‘संपूर्ण रामायण’, ‘योगवासिष्ठ’ आदि उत्तमोत्तम सैकड़ों गं्रथ थे। पत्रिकाएं तथा विवेकानंद, रामकृष्ण के चरित्र और ग्रंथों की तो इतनी प्रतियां थी कि पूछिए मत। वहां पर हमने बंगला भाषा का जी भरके अध्ययन किया। लंदन में सन् 1857 के क्रांतियुद्व
उस ग्रंथालय में बंगला भाषा के राजा राममोहन राय, विद्यासागर आदि महापुरूषों के चरित्र, नवीन सेन राय, रवींद्रनाथ आदि के प्रायः सभी गं्रथ, जोगेश चंद्र आदि की गं्रथावलियां, ‘संपूर्ण महाभारत’, ‘संपूर्ण रामायण’, ‘योगवासिष्ठ’ आदि उत्तमोत्तम सैकड़ों गं्रथ थे। पत्रिकाएं तथा विवेकानंद, रामकृष्ण के चरित्र और ग्रंथों की तो इतनी प्रतियां थी कि पूछिए मत। वहां पर हमने बंगला भाषा का जी भरके अध्ययन किया। लंदन में सन् 1857 के क्रांतियुद्व