ने संग्रहीत किए थे। थियोसाॅफी के ग्रंथों की भी कमी नहीं थी। प्रथम उपरिनिर्दिष्ट गं्रथों में राजनीति से संबंधित प्रत्येक गं्रथ को लेकर हमें झगड़े करने पड़े, तब कहीं जाकर उनकी प्राप्ति हो सकी थी। एक विकासप्रिय पर्यवेक्षक को छोड़कर हमारा यह ग्रंथालय सभी अधिकारियों की आंख की किरकिरी बन चुका था, सभी की आंखों को खटक रहा था। हिंदुस्थान से किसी बड़े अधिकारी के आते ही बारी राजनीतिक पुस्तकों को छिपाने का प्रबंध करता, अन्यथा वह जली-कटी
ने संग्रहीत किए थे। थियोसाॅफी के ग्रंथों की भी कमी नहीं थी। प्रथम उपरिनिर्दिष्ट गं्रथों में राजनीति से संबंधित प्रत्येक गं्रथ को लेकर हमें झगड़े करने पड़े, तब कहीं जाकर उनकी प्राप्ति हो सकी थी। एक विकासप्रिय पर्यवेक्षक को छोड़कर हमारा यह ग्रंथालय सभी अधिकारियों की आंख की किरकिरी बन चुका था, सभी की आंखों को खटक रहा था। हिंदुस्थान से किसी बड़े अधिकारी के आते ही बारी राजनीतिक पुस्तकों को छिपाने का प्रबंध करता, अन्यथा वह जली-कटी