सुनाता। परंतु आगे चलकर वह सबकुछ हजम हो गया। इतना ही नहीं अपितु यूरोपीय अधिकारी भी गं्रथालय में अपनी पुस्तकें रखने लगे और उनमें से स्वयं भी पढ़ने लगे। ऐसे ही एक अधिकारी ने एनी बेसेंट के आत्मकथा से लेकर कृष्णमूर्ति के ‘मेरे गुरूदेव’ तक थियोसाॅफी की कई पुस्तकें दी थी। इस सारे ग्रंथों का हमने यत्नपूर्वक अध्ययन किया। एक भी गं्रथ हमसे अछूता
नहीं रहा। कई गं्रथों का पारायण किया और राजबंदियों में से अनेक द्वारा इतिहास अर्थशास्त्र,
सुनाता। परंतु आगे चलकर वह सबकुछ हजम हो गया। इतना ही नहीं अपितु यूरोपीय अधिकारी भी गं्रथालय में अपनी पुस्तकें रखने लगे और उनमें से स्वयं भी पढ़ने लगे। ऐसे ही एक अधिकारी ने एनी बेसेंट के आत्मकथा से लेकर कृष्णमूर्ति के ‘मेरे गुरूदेव’ तक थियोसाॅफी की कई पुस्तकें दी थी। इस सारे ग्रंथों का हमने यत्नपूर्वक अध्ययन किया। एक भी गं्रथ हमसे अछूता
नहीं रहा। कई गं्रथों का पारायण किया और राजबंदियों में से अनेक द्वारा इतिहास अर्थशास्त्र,