मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

शासनशास्त्र विषयक पुस्तकों का अध्ययन करवाया। उनसे निबंध लिखवाते, ताकि उनके विचार विकसित हों। जैसाकि पीछे वर्णन किया गया है, रविवार की सभा में उनके व्याख्यान करवाते। ‘स्टेट’ जैसे कठिन गं्रथ दस-पांच जनों को संगठित करके पढ़ाते, जैसे महाविद्यालयों वर्गो में पढ़ाया जाता है।

सस्ंकृत गं्रथों में हमने जो पुस्तकें, काव्य मंगवाए थे, बस उतने ही वहां थे। शेष एकाध पुस्तक किसी की हो या न भी हो। परंतु अनूदित पुस्तकों में भी अनेक संस्कृत गं्रथ मूल सहित छापे जाते। सभी ‘उपनिषद्’,


1024 of 2228

शासनशास्त्र विषयक पुस्तकों का अध्ययन करवाया। उनसे निबंध लिखवाते, ताकि उनके विचार विकसित हों। जैसाकि पीछे वर्णन किया गया है, रविवार की सभा में उनके व्याख्यान करवाते। ‘स्टेट’ जैसे कठिन गं्रथ दस-पांच जनों को संगठित करके पढ़ाते, जैसे महाविद्यालयों वर्गो में पढ़ाया जाता है।

सस्ंकृत गं्रथों में हमने जो पुस्तकें, काव्य मंगवाए थे, बस उतने ही वहां थे। शेष एकाध पुस्तक किसी की हो या न भी हो। परंतु अनूदित पुस्तकों में भी अनेक संस्कृत गं्रथ मूल सहित छापे जाते। सभी ‘उपनिषद्’,


1024 of 2228