‘ऋग्वेद,’ ‘रामायण’, ‘महाभारत’, ‘ब्रह्मसूत्र’, ‘सांख्य सूत्र’, ‘ईश्वरचंद्र की कारिकाएं’, ‘योगसूत्र’ आदि संस्कृत गं्रथों का परिशीलन वहां पर किया जा सकता था।
बंगला अथवा मराठी, संस्कृत, अंगे्रजी, हिंदी, पंजाबी-किसी भी भाषा की नई पुस्तक प्रकाशित होने का समाचार मिलते ही यदि वह महत्तवपूर्ण हो तो तुरंत मंगवाई जाती। इस तरह यद्यपि स्वदेशीय नाड़ियों के स्वर अविरल रूप से हमारे ह्नदय में गूंज रहे थे। विश्व के प्रत्येक नव विचार की
‘ऋग्वेद,’ ‘रामायण’, ‘महाभारत’, ‘ब्रह्मसूत्र’, ‘सांख्य सूत्र’, ‘ईश्वरचंद्र की कारिकाएं’, ‘योगसूत्र’ आदि संस्कृत गं्रथों का परिशीलन वहां पर किया जा सकता था।
बंगला अथवा मराठी, संस्कृत, अंगे्रजी, हिंदी, पंजाबी-किसी भी भाषा की नई पुस्तक प्रकाशित होने का समाचार मिलते ही यदि वह महत्तवपूर्ण हो तो तुरंत मंगवाई जाती। इस तरह यद्यपि स्वदेशीय नाड़ियों के स्वर अविरल रूप से हमारे ह्नदय में गूंज रहे थे। विश्व के प्रत्येक नव विचार की