लहर हम जगद्बहिष्कृत निर्वासितों की मज्जा-पीठ के तट को स्पर्श किए बिना नहीं रहती।
राजबंदियों के उच्च विचारों को गति देने के लिए जब तक इस गं्रथालय का इतना विशाल रूप सामने नहीं आया था तब तक हम नानावधि युक्तियां करते थे। उदाहरण के लिए एक बार सभी से यही प्रश्न किया कि पेशवाई के अस्त के उपरांत हिंदुस्थान में जो नामवर राष्ट्रीय महापुरूष हुए, उनके नाम प्रत्येक व्यक्ति बताए। उनमें से अंत में ऐसे बारह चुने जाएंगे, जिन्हें सर्वाधिक
लहर हम जगद्बहिष्कृत निर्वासितों की मज्जा-पीठ के तट को स्पर्श किए बिना नहीं रहती।
राजबंदियों के उच्च विचारों को गति देने के लिए जब तक इस गं्रथालय का इतना विशाल रूप सामने नहीं आया था तब तक हम नानावधि युक्तियां करते थे। उदाहरण के लिए एक बार सभी से यही प्रश्न किया कि पेशवाई के अस्त के उपरांत हिंदुस्थान में जो नामवर राष्ट्रीय महापुरूष हुए, उनके नाम प्रत्येक व्यक्ति बताए। उनमें से अंत में ऐसे बारह चुने जाएंगे, जिन्हें सर्वाधिक