मत प्राप्त होंगे। सप्ताह भर तक यही चर्चा थी, अंत में नामावलियां आ गई, परंतु उनमें सन् 1857 के क्रांतिवीरों में से किसी एक का नाम भी किसी को नहीं सूझा। राष्ट्रीय पुरूषों में सन् 1857 की क्रांति में से एक ने केवल एक ही नाम सुझाया- वह था लक्ष्मीबाई का। शेष लोगों के दिमाग में यह नाम भी नहीं आया। अतः उस इतिहास पर हमने कई बार बैठकों में व्याख्यान, संवाद तथा व्यक्तिगत चर्चा की। बंगला में प्रकाशित रजनीकांत की ‘सिपाही युद्व’ शीर्षक
मत प्राप्त होंगे। सप्ताह भर तक यही चर्चा थी, अंत में नामावलियां आ गई, परंतु उनमें सन् 1857 के क्रांतिवीरों में से किसी एक का नाम भी किसी को नहीं सूझा। राष्ट्रीय पुरूषों में सन् 1857 की क्रांति में से एक ने केवल एक ही नाम सुझाया- वह था लक्ष्मीबाई का। शेष लोगों के दिमाग में यह नाम भी नहीं आया। अतः उस इतिहास पर हमने कई बार बैठकों में व्याख्यान, संवाद तथा व्यक्तिगत चर्चा की। बंगला में प्रकाशित रजनीकांत की ‘सिपाही युद्व’ शीर्षक