‘प्रताप’, ‘केसरी’ और कभी-कभी ‘संदेश’। ‘चित्रमय जगत’, ‘सरस्वती’, ‘आर्य गजट’, ‘बंगाली’, ‘प्रभात’, इस तरह कितने सारे समाचार-पत्र बंदीवान पढ़ने लगे। इसके लिए कइयों को दंड मिला, कितने वाॅर्डर ‘टूट’ गए, कितने बंदी-लेखकों को निकाल दिया गया, परंतु समाचार-पत्रों का बंदीशाला की तालाबंद कोठरियों में पढ़ने के लिए मिलते और फिर अदृश्य हो जाते थे। इसके अतिरिक्त बाहर जो बड़े-बड़े भारतीय अधिकारी थे, उनके लिए जो हमने एक राजनीतिक गं्रथों की सूची तैयार करके रखी थी,
‘प्रताप’, ‘केसरी’ और कभी-कभी ‘संदेश’। ‘चित्रमय जगत’, ‘सरस्वती’, ‘आर्य गजट’, ‘बंगाली’, ‘प्रभात’, इस तरह कितने सारे समाचार-पत्र बंदीवान पढ़ने लगे। इसके लिए कइयों को दंड मिला, कितने वाॅर्डर ‘टूट’ गए, कितने बंदी-लेखकों को निकाल दिया गया, परंतु समाचार-पत्रों का बंदीशाला की तालाबंद कोठरियों में पढ़ने के लिए मिलते और फिर अदृश्य हो जाते थे। इसके अतिरिक्त बाहर जो बड़े-बड़े भारतीय अधिकारी थे, उनके लिए जो हमने एक राजनीतिक गं्रथों की सूची तैयार करके रखी थी,