के प्रायः सभी प्रमुख समाचार-पत्र भी मंगवाए जाने लगे। ऐसे बंदी को, जिसे स्वदेश में रहते समाचार-पत्र क्या बला होती है, इसका रत्ती भर भी ज्ञान नहीं था-प्रथमतः नियम बनाकर समाचार-पत्र पढ़ने के लिए बाध्य किया जाता। अंततोगत्वा उनमें इतनी रूचि उत्पन्न हो गई कि समाचार-पत्र आते ही उसका अपने हाथ में आना ही दूभर हो गया। अतः कोई एक चोरी-छिपे पढ़ लेता और दस लोग उसे सुनते। पत्र पहले मैं पढ़ूं वह नहीं, इस तरह होनेवाले झगड़े देखकर हमें खुशी होती। ‘भारत मित्र’,
के प्रायः सभी प्रमुख समाचार-पत्र भी मंगवाए जाने लगे। ऐसे बंदी को, जिसे स्वदेश में रहते समाचार-पत्र क्या बला होती है, इसका रत्ती भर भी ज्ञान नहीं था-प्रथमतः नियम बनाकर समाचार-पत्र पढ़ने के लिए बाध्य किया जाता। अंततोगत्वा उनमें इतनी रूचि उत्पन्न हो गई कि समाचार-पत्र आते ही उसका अपने हाथ में आना ही दूभर हो गया। अतः कोई एक चोरी-छिपे पढ़ लेता और दस लोग उसे सुनते। पत्र पहले मैं पढ़ूं वह नहीं, इस तरह होनेवाले झगड़े देखकर हमें खुशी होती। ‘भारत मित्र’,