हमारे गं्रथालय में जिन पुस्तकों को अपठनीय अथवा भयंकर समझकर भीतर नहीं आने दिया जाता, उन्हें हम बाहरी गं्रथालय से मंगवाते। रूसी पुस्तकें और विशेषतः वे समाचार-पत्र, जिनका बंदीशाला में आना अत्यंत दुर्लभ था- बाहर के इस चलते-फिरते गं्रथालय में ही मंगवाए जाते और उसके पश्चात् हस्ते-पर-हस्ते उन्हें अप्रकट रूपेण बंदीशाला में लाकर उन राजबंदियों को पढ़ने के लिए दिया जाता, जो अंगे्रजी नहीं जानते थे या आवश्यक ही हो जाए तो जानते थे।
हमारे गं्रथालय में जिन पुस्तकों को अपठनीय अथवा भयंकर समझकर भीतर नहीं आने दिया जाता, उन्हें हम बाहरी गं्रथालय से मंगवाते। रूसी पुस्तकें और विशेषतः वे समाचार-पत्र, जिनका बंदीशाला में आना अत्यंत दुर्लभ था- बाहर के इस चलते-फिरते गं्रथालय में ही मंगवाए जाते और उसके पश्चात् हस्ते-पर-हस्ते उन्हें अप्रकट रूपेण बंदीशाला में लाकर उन राजबंदियों को पढ़ने के लिए दिया जाता, जो अंगे्रजी नहीं जानते थे या आवश्यक ही हो जाए तो जानते थे।