मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas



बंदियों को पढ़ाने का अन्य लाभ यह हुआ किया उन्हें साधारण पढ़ना-लिखना, अंकगणित आते ही और दो-तीन अंगे्रजी पुस्तकें समाप्त होते ही वे ‘मंुशी’ हो सकते


थे। उस दृष्टि से ऐसे देशहितैषी हिंदू बंदीवान जो हमारी शिक्षा में निपुण हो गए थे-बंदीशाला में, कार्यालय में और बाहर के जिले में ‘लेखक’ के और अन्य बंदी-अधिकारियों के स्थान पर नियुक्त किए गए। उस योग से उनका दैहिक कष्ट तो दूर हुआ ही, उनकी अंटी में चार पैसे भी आ गए। परंतु प्रचार


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बंदियों को पढ़ाने का अन्य लाभ यह हुआ किया उन्हें साधारण पढ़ना-लिखना, अंकगणित आते ही और दो-तीन अंगे्रजी पुस्तकें समाप्त होते ही वे ‘मंुशी’ हो सकते


थे। उस दृष्टि से ऐसे देशहितैषी हिंदू बंदीवान जो हमारी शिक्षा में निपुण हो गए थे-बंदीशाला में, कार्यालय में और बाहर के जिले में ‘लेखक’ के और अन्य बंदी-अधिकारियों के स्थान पर नियुक्त किए गए। उस योग से उनका दैहिक कष्ट तो दूर हुआ ही, उनकी अंटी में चार पैसे भी आ गए। परंतु प्रचार


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