की दृष्टि से एक महत्तवपूर्ण लाभ यह हुआ कि जैसे-जैसे अधिकारी पद इन लोगों के हाथ में, जिनमें सार्वजनिक आस्था की कुछ गंध थी, आते गए वैसे-वैसे बंदियों तथा स्वतंत्र उपनिवेशवालों में स्वदेशी व्रत और स्वदेशी पक्ष का प्रचार परिवर्धित होने के लिए उपयोग होने लगा और उससे सरकारी कामकाज में कुछ अनुचित व्यवधान आया ही नहीं। इसके विपरीत, बंदियांे में देशभिमानादि उदात्त भावनाओं का उदय हुआ और उनमें मानसिक तथा नैतिक सुधार हो जाने से झगड़े कम होने लगे,
की दृष्टि से एक महत्तवपूर्ण लाभ यह हुआ कि जैसे-जैसे अधिकारी पद इन लोगों के हाथ में, जिनमें सार्वजनिक आस्था की कुछ गंध थी, आते गए वैसे-वैसे बंदियों तथा स्वतंत्र उपनिवेशवालों में स्वदेशी व्रत और स्वदेशी पक्ष का प्रचार परिवर्धित होने के लिए उपयोग होने लगा और उससे सरकारी कामकाज में कुछ अनुचित व्यवधान आया ही नहीं। इसके विपरीत, बंदियांे में देशभिमानादि उदात्त भावनाओं का उदय हुआ और उनमें मानसिक तथा नैतिक सुधार हो जाने से झगड़े कम होने लगे,