जो कि प्रायः व्यसनासक्ति, नृशंसता, दुष्टता, लूटपाट आदि दुर्गुणांे के कारण होते थे। उपनिवेश बसाने का जो मुख्य ध्येय ‘बंदियों में सुधार’ लाना था, वह भी थोड़ा-बहुत पूरा होने लगा। इस प्रयास को वस्तुतः सरकार को ही प्रोत्साहित करना चाहिए था और वास्तव में तो इस कार्य से सभी को संतुष्ट होना चाहिए था, परंतु उधर ऐसे ही अधिकारियों की भरमार थी जिन्हें ‘बंदियों का सुधार’ जैसे ध्येय का ज्ञान ही नहीं था और जिनकी यही धारणा थी कि कठोर-कड़ा
जो कि प्रायः व्यसनासक्ति, नृशंसता, दुष्टता, लूटपाट आदि दुर्गुणांे के कारण होते थे। उपनिवेश बसाने का जो मुख्य ध्येय ‘बंदियों में सुधार’ लाना था, वह भी थोड़ा-बहुत पूरा होने लगा। इस प्रयास को वस्तुतः सरकार को ही प्रोत्साहित करना चाहिए था और वास्तव में तो इस कार्य से सभी को संतुष्ट होना चाहिए था, परंतु उधर ऐसे ही अधिकारियों की भरमार थी जिन्हें ‘बंदियों का सुधार’ जैसे ध्येय का ज्ञान ही नहीं था और जिनकी यही धारणा थी कि कठोर-कड़ा