काम करवाना ही बंदी विभाग का परम कर्तव्य है। अतः यह सब कार्य लगभग दंडनीय ही समझे जाने का भय था, इसीलिए वह अप्रकट रूप से करना पड़ता था।
प्रकरण-2
अंदमान में शुद्वि
हमने सन् 1911 में अंदमान में पांव रखा था। उसके पश्चात् कुछ ही महीनों में हमें ज्ञात हो गया कि कुछ हिंदू बंदी अंदमान में आने के पश्चात् मुसलमान बन गए हैं और उन्होंने अपने नाम भी बदल डाले हैं। हम उनकी खोज करने लगे कि यह कैसे हुआ? वहां के हिंदुओं में किसी को
काम करवाना ही बंदी विभाग का परम कर्तव्य है। अतः यह सब कार्य लगभग दंडनीय ही समझे जाने का भय था, इसीलिए वह अप्रकट रूप से करना पड़ता था।
प्रकरण-2
अंदमान में शुद्वि
हमने सन् 1911 में अंदमान में पांव रखा था। उसके पश्चात् कुछ ही महीनों में हमें ज्ञात हो गया कि कुछ हिंदू बंदी अंदमान में आने के पश्चात् मुसलमान बन गए हैं और उन्होंने अपने नाम भी बदल डाले हैं। हम उनकी खोज करने लगे कि यह कैसे हुआ? वहां के हिंदुओं में किसी को