भी इसके संबंध में कुछ खास पता नहीं चला। मैंने देखा, उनकी राय में यह एक इतनी परिचित घटना है कि उसकी पूछताछ क्या करना। वस्तुतः अंदमान में अंगे्रज अधिकारियों की एकच्छत्र समर्थ सत्ता होने से वहां उनके हाथ में निराधार तथा अनाथ बने हिंदू बंदियों को ईसाई बनाए जाने की अधिक संभावना थ। सन् 1857 तक कार्यालयों में ही नहीं अपितु सेना में भी ईसाई धर्म का प्रसार करने के लिए अधिकारियों द्वारा अधिक सुविधाएं दी जाती थी। परंतु सन् 1857
भी इसके संबंध में कुछ खास पता नहीं चला। मैंने देखा, उनकी राय में यह एक इतनी परिचित घटना है कि उसकी पूछताछ क्या करना। वस्तुतः अंदमान में अंगे्रज अधिकारियों की एकच्छत्र समर्थ सत्ता होने से वहां उनके हाथ में निराधार तथा अनाथ बने हिंदू बंदियों को ईसाई बनाए जाने की अधिक संभावना थ। सन् 1857 तक कार्यालयों में ही नहीं अपितु सेना में भी ईसाई धर्म का प्रसार करने के लिए अधिकारियों द्वारा अधिक सुविधाएं दी जाती थी। परंतु सन् 1857