डाकेजनी आदि पाप करते हैं और दंड भुगतते हैं-उनकी मनोवृत्तिा का जिन्हें ज्ञान है, वे इस बात को तुरंत स्वीकार करेंगे कि हिंदुओं के घर की हुई चोरी अथवा हिंदू गांवों अथवा व्यापारियों पर डाला हुआ डाका-मुसलमानी अड्डों में क्षम्य माना जाता है। इतना ही नहीं, वह प्रशंसनीय भी समझा जाता है। हमने ऐसे मौलवी देखे हैं, जो इस तरह के अपराधियों का निरपराध समझते हैं। इस प्रकार की मनोवत्तिा के इस व्यवसाय को अपनाए हुए वे आततायी लोग अपने धर्म की मद्यपान निषेध,
डाकेजनी आदि पाप करते हैं और दंड भुगतते हैं-उनकी मनोवृत्तिा का जिन्हें ज्ञान है, वे इस बात को तुरंत स्वीकार करेंगे कि हिंदुओं के घर की हुई चोरी अथवा हिंदू गांवों अथवा व्यापारियों पर डाला हुआ डाका-मुसलमानी अड्डों में क्षम्य माना जाता है। इतना ही नहीं, वह प्रशंसनीय भी समझा जाता है। हमने ऐसे मौलवी देखे हैं, जो इस तरह के अपराधियों का निरपराध समझते हैं। इस प्रकार की मनोवत्तिा के इस व्यवसाय को अपनाए हुए वे आततायी लोग अपने धर्म की मद्यपान निषेध,