के अड्डे पर पांव रखते ही अपना हिंदू धर्म खो बैठते हैं। यह बात उस मुसलमानी अड्डे के महंतों को ही नहीं, अपितु उन बदमाश बच्चों को भी, जिन्हें इनको फंसाने के लिए नियुक्त किया जाता है, ज्ञात रहती है और वे जी-जान से इन हिंदू बच्चों को धर्मभ्रष्ट करने का हेतूपूर्वक प्रयास करते हैं, क्योंकि जैसा ऊपर कहा गया है, उनके पाप कर्माें में इन हिंदू बालकों द्वारा सहायता ही मिलती है। उन्हें उस परलौकिक दंड से मुक्ति मिलती है, जो उन्हें इस पाप के लिए मिलनेवाला था। इतना ही नहीं,
के अड्डे पर पांव रखते ही अपना हिंदू धर्म खो बैठते हैं। यह बात उस मुसलमानी अड्डे के महंतों को ही नहीं, अपितु उन बदमाश बच्चों को भी, जिन्हें इनको फंसाने के लिए नियुक्त किया जाता है, ज्ञात रहती है और वे जी-जान से इन हिंदू बच्चों को धर्मभ्रष्ट करने का हेतूपूर्वक प्रयास करते हैं, क्योंकि जैसा ऊपर कहा गया है, उनके पाप कर्माें में इन हिंदू बालकों द्वारा सहायता ही मिलती है। उन्हें उस परलौकिक दंड से मुक्ति मिलती है, जो उन्हें इस पाप के लिए मिलनेवाला था। इतना ही नहीं,